Breaking

Post Top Ad

Wednesday

जूनागढ़ दुर्ग बीकानेर Junagadh Fort Bikaner



इस दुर्ग की नींव रांवबीका  ने रखी, तय इसे बीकानेर का किला कहते थे, 
जिसे तुड़वाकर पुन: निर्माण रायसिट्ठे ने 1 5 8 8 ई. में हिन्दूव मुगल शैली में करवाया, तब इसे जूनागढ़ का किला  कहने लगे । 

यह दुल स्थल दुर्ग की श्रेणी में आता है इसलिए इसे " जमीन का जेवर' कहा जाता है

, तो यह रातीघाटी नामक स्थान पर बना हुआ हैं, इसी कारण इस दुर्ग को रातीघाटी का किला भी कहते हैं । 


इस दुर्ग की आकृति चर्युभुजाकार है एवं इसका निर्माण लाल पत्थर ये हुआ है । 

जूनागढ़ दुर्ग रेगिस्तान में बने सभी दुर्गों में सर्वश्रेष्ठ हैं ।
इस किले  में बने महलों के वारे में कहा जाता है कि ' ' दीवारों के कान होते हैं परन्तु जूनागढ़ की दीवारे बोलती हैं । 

इस दुर्ग में बने कर्ण महल का निर्माण महाराजा अनूपसिंह ने महाराजा कर्णसिंह की वाद में करवाया । 

इस किले मे बने अनूप महल ' में सोने की कलम से कृणारासलीला पर कार्य किया गया है ।

 राजस्थान में पहली बार इसी दुर्ग में लिफ्ट लगाई गई, तो. रायसिंह ने इस दुर्ग के सूरजपोल में हाथियों पर सवारजयमल व पत्ता की  मूर्तियाँ लगवाई थी ।

 " इस किले में तैतीस करोड़ देवी-देवताओं का मन्दिर दर्शनीय हैं । 

सूरसिह ने इसमे सूरसागर झोल बनवाईं, जिसका वसुन्थरा राजे ने जीर्णोद्धार करवाकर 15 अगस्त, 2008 को इसमें नौकायन का उत्घाटन किया ।

 इस दुर्ग में एक भी साका नहीं हुआ है ।


 जूनागढ़ किले के कर्ण महल (सार्वजनिक दर्शक हाँल) , अनूप महल (प्रशासनिक संग्रहालय) , गंगा महल (गंगा सिंह द्वारा निर्मित प्रथमं विश्व युद्ध के विमानों का एक मुख्यश्वलय) , बादल महल ( दीवारों पर भगवान कृष्ण और राधा के भित्ति चित्रों का चित्रण) प्रसिद्ध है ! 

जूनागढ़ के कर्णपोल प्रवेश द्वारा को ऐतिहासिक समय का  मुख्य द्वारा माना जाता हैं 

No comments:

Post a Comment

Do not post spam link comments